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Friday, January 16, 2009

ये है बंगलोर - बंगलोरु (जो कह लें )

क्यूँ कहते हैं बंगलोर को " है - टेक" सिटी ..

२ पोस्ट पहले मैंने बंगलोर और उसकी खूबसूरती का जिक्र किया था | वो खुमारी तो अभी तक उतरी नही है | पहले मैं हरेक शनिवार को बंगलोर जाया करता था | लेकिन अब काम और जिम्मेवारी बढ़ जाने के कारण नही जा पाता हूँ | लेकिन कोशिश रहती है की जब भी मौका मिले चला जाऊं | पिछले पोस्ट में मैंने कहा था की समय मिलेगा तो बंगलोर की कुछ फोटोग्राफ्स आपलोगों के साथ शेयर करूँगा | समय मिला तो नही पर हाँ समय निकाल कर कुछ फोटोग्राफ्स यहाँ पोस्ट कर रहा हूँ | आशा करता हूँ की आपलोगों को पसंद आएगा |

सबसे पहले इस्कॉन मन्दिर का दर्शन करें |




ये तस्वीर यहाँ के राजा केम्प गोडा की है | इनके नाम से बंगलोर में एक पुरी जगह है |


बंगलोर बुल-मन्दिर | काफ़ी प्रसिद्ध है | कहते हैं यहाँ जो मांगो , मिल जाता है |


ये बंगलोर का महाराजा पैलेस है |



बंगलोर सरकारी कार्यालय(विधान- सौधा)|



बंगलोर का लालबाग गार्डन | बंगलोर जाए तो यहाँ जरुर जाएँ |





और ये अनोखा पेड़ जो लालबाग में है


लालबाग का ग्लास हाउस |


बंगलोर की कुछ आईटी कंपनी ....

Microsoft:



Intel-tech park:


बंगलोर का सुर्ययास्त ....

एक झलक बंगलोर के हेब्बल फ्लाई ओवर की


७-स्टार लीला पैलेस |

बस ये थोडी झलक थी बंगलोर की | और बहुत सारे चीज़ है जो आपको बंगलोर का दीवाना बना सकता है | मुझे जो सबसे अच्छी लगती है वो है यहाँ का जलवायु | आप भी बताएं आपको कैसा लगा बंगलोर ?

Photographs:Courtesy-Google

Monday, January 12, 2009

साप्ताहांत बंगलोर में - एक मैक्रो पोस्ट

काश ये समय यहीं रुक जाता , काश मैं कुछ लम्हे और यहाँ बिता सकता | इसबार भी मैं साप्ताहांत मनाने बंगलोर गया हुआ था | वो शीतल हवाएं , गुनगुने धुप मुझे अपने शहर की याद दिला देते हैं | अन्तर सिर्फ़ इतना है की बंगलोर में नॉर्थ इंडिया जैसा कडाके की ठण्ड नही पड़ती है | यहाँ की शीतल हवा में अजीब सी ताजगी रहती है , आपका रोम रोम प्रफुल्लित महसूस करता है | यहाँ आने पर मुझे लगता है की मैं प्रकृति के करीब आ गया हूँ | सारी थकान ख़ुद - ब - ख़ुद गायब हो जाती है |

कहते भी हैं की अगर अपने आप में नई ताजगी , नई स्फूर्ति पैदा करना चाहते हैं तो प्रकृति के करीब जाइए | बंगलोर तो ऐसा शहर है जो प्रकृति की गोद में बसा हुआ है | अब तो काफ़ी कुछ बदल गया है , लेकिन अब से कुछ साल पहले करीब १९९७ में मैं पहली बार बंगलोर गया था | उस वक्त आपकी नज़र जिधर जाती उधर आपको हरयाली ही हरयाली दिखती | अब तो केवल कंक्रीट के जंगल जयादा दीखते हैं | जिस निर्बाध तरीके से पेड़ों की कटाई चल रही है वो दिन दूर नही जब चारो तरफ़ सिर्फ़ कंक्रीट के जंगल ही दिखेंगे |

लेकिन अभी भी ये शहर अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विख्यात है | इस शहर के बारे में कभी आराम से कुछ चित्रों के साथ लिखूंगा | बस अभी जल्दी जल्दी ऑफिस के काम निपटा लूँ |