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Thursday, January 8, 2009

मोबाइल से ये भी कर सकते हैं ?


आज कल मोबाइल जिस धड़ल्ले से प्रयोग में है वो दिन दूर नही जब हम में से हरेक के पास मोबाइल भी होगा | इसमे कुछ ग़लत भी नही है , आज इससे अच्छा साधन नहीं है जिसका हम प्रयोग करके अपने प्रियजनों का हाल चाल ले सकें एवं उनसे संपर्क में रह सकें | जिस हिसाब से मोबाइल के उपभोक्ता बढ़ रहें हैं उसी हिसाब से मोबाइल की चोरी , छीनाझपटी भी बढ़ रही है | अगर हम कुछ बातें का धयान रखे तो हम अपने मोबाइल को जयादा सुरक्षित बना सकते हैं | कुछ ऐसी भी बातें हैं जो हमें अपने मोबाइल के बारे में नही मालूम है | चलिए एक मोबाइल कुछ ख़ास क्या क्या कर सकता है वो देखते हैं ?

१) मान लीजिये आप ऐसी जगह चले गए हों जहाँ पर मोबाइल का नेटवर्क काम ना कर रहा हो , और आपको कोई इमर्जेंसी कॉल करना हो , तो ? बस आपको करना ये है की आप अपने मोबाइल से ११२ डायल करे | ११२ डायल करने के बाद आपका मोबाइल स्थानीय नेटवर्क की खोज करता है और आपको सुविधा प्रदान करता है की आप इमर्जेंसी नम्बर पर डायल कर सके | और हाँ , अगर आपका कुंजीपटल लाक भी हो तो आप ये नम्बर डायल कर सकते हैं |

२) अब ये देखिये ... आज कल हर कार में रिमोट Locking की सुविधा होती है | मान लीजिये कार लाक करते समय आप कार की ऑटोमेटिक चाभी कार में ही भूल जाते हैं , और कार बाहर से लाक हो जाता है , तब क्या करेंगे आप ? हाँ आपके पास एक अतिरिक्त रिमोट चाभी आपके घर पर होती है | बस आपको करना क्या होता है की अपने घर पर किसी को फ़ोन मिलाएँ और उनसे कहे की वो चाभी अपने मोबाइल के पास लायें | इधर आप भी अपना मोबाइल कार के दरवाज़े के १ फ़ुट की दूरी पर रखे | अब उनसे कहें की वो रिमोट चाभी को मोबाइल के पास लाकर उसका Unlock का बटन दबाये | बस हो गया काम , बटन दबाते ही इधर आपके कार का दरवाजा खुल जायेगा | मैंने अभी तक इसे नही जांचा है , आप जांचे और हमें बताएं |

३) ये कुछ ऐसा है की मेरे मोबाइल पर काम नही कर रहा है | जानकारों का कहना है की ये कुछ चुनिन्दा मोबाइल डिवाइस पर ही काम करता है | ये ऐसा है की अगर आपका मोबाइल पुरी तरह डिस्चार्ज हो गया हो तो बस आप अपने मोबाइल पर *३३७०# डायल करें | जानकारों का कहना है की ये आपके मोबाइल से रिज़र्व उर्जा को लेकर फिर से कुछ देर बात करने लायक बना देता है |

४)और सबसे मस्त ..अपने मोबाइल डिवाइस को चोरी हो जाने के बाद कैसे निरुपयोगी बनाए |
इसके लिए आपको करना क्या है की बस अपने मोबाइल पर *#०६# डायल करें | एक १५ अंको का कोड आपको मिलेगा , आप बस उसे कहीं नोट कर के रख लें | अगर खुदा न खास्ता आपका मोबाइल कभी चोरी हो गया तो बस आप अपने सर्विसकर्ता (एयरटेल, वोडाफोन ,....) को फ़ोन करें और उन्हें अपना नोट किया हुआ नम्बर दे दें | उसके बाद सर्विस कर्ता आपके मोबाइल हैंडसेट को ब्लाक कर देगा | इससे होगा क्या जिसने भी उस मोबाइल को चुराया होगा वो कभी उस मोबाइल का उपयोग नही कर पायेगा | अगर वो सिम भी बदल लेता है फिर भी वो उसका उपयोग नही कर पायेगा |

इसके अलावा अब तो बहुत सारी हैंडसेट में ये खूबी आ गई है की अगर आपका मोबाइल चोरी हो गया हो तो आप उस हैंडसेट में लगे डिवाइस से पता लगा सकते हैं की आपका मोबाइल कहाँ पर है |

चलिए आज के लिए इतना ही | आशा करता हूँ ये कुछ हद्द तक आपलोगों के लिए उपयोगी होगा |

Thursday, December 25, 2008

मानसिक हलचल की हलचले


कल सुबह सुबह ज्ञानदत्त जी का ब्लॉग पढ़ा | पढ़ते ही मानसिक हलचल शुरू हो गई | काफ़ी कुछ पढ़ कर अच्छा लगा ,कुछ पढ़ कर अच्छा नही लगा | अब तक बहुत सारे लोग अपने विचार व्यक्त कर चुके हैं|

पीडी ने कुछ अच्छे सवाल उठाये | धीरू भाई को उनसे प्रेरणा मिली ,कुश भाई को पढ़ते पढ़ते ऊब होने लगी तो अवधिया जी ने ऊब को खतरनाक की संज्ञा दे डाली| डॉक्टर अनुराग जी ने अपनी बातो को सिलसिलेवार तथा क्रमबद्ध तरीके से रखा और ताऊ ने इसे जीवन की परिभाषा बतायी |

अब कुछ मेरी बातें | अपनी बातें शुरू करने से पहले मैं ज्ञानदत्त जी से कहना चाहूँगा की इस चिट्ठे को अन्यथा न ले | ये बस मेरे विचार है , अगर इससे आपकी भावनायें को ठेस पहुँचती है तो मैं माफ़ी चाहूँगा | अपना समझ कर माफ़ कर दे |

सृजन की प्रक्रिया कितनी भी धीमी और श्रमसाध्य होती हो पर सृजन वही कर सकता है जिसकी उसमे रूचि हो| बिना रूचि के कोई भी सृजन नही हो सकता है , और जहाँ रूचि होगी वहां ऊब नही हो सकती है | हाँ , छनिक ऊब की अगर हम बात करे तो वो मैं मान सकता हूँ , पर वो भी तब आती है जब आप लगातार किसी एक काम को किया जा रहे हैं , और करते करते इतना थक जाते है की कुछ देर के लिए विश्राम चाहते हैं | अगर ये ऊब है तो मुझे इसमे कोई बुराई नही दिखती है |

मैं नई पीढी का हूँ | मुझे कभी अकेलेपन से डर नही लगा | और मैं तो अक्सर अकेले रहने की कोशिश करता हूँ | और जहाँ तक बात है पुस्तकालय में समय काटना की तो अभी अपनी पीढी के सैकडों लोगो को जानता हूँ ,जो पुस्तकालय में ही समय काटना पसंद करते हैं , मैं जिस छेत्र में हूँ उसमे समय काफ़ी मुश्किल से हमें मिल पाता है | बहुत से ऐसे लेख मैंने पढ़े हैं जिसमे एक सॉफ्टवेर इंजिनियर के बारे मैं लिखा गया हो | इसलिए इनकी जिंदगी कैसी और कितनी व्यस्त होती है कहने की जरुरत नही है , फिर भी हमें जब भी मौका मिलता है,प्रेमचंद को पढ़ते हैं और गालिब को सुनते हैं | मैं और मेरे दोस्त कोई भी अच्छी रचना , अच्छी बुक मिस नही करना चाहते , चाहे वो हिन्दी की मधुभुशन दत्ता, हो या फिर काजी जरुल इस्लाम ,या धन गोपाल मुख़र्जी ,या मुकुल केसवन, या राज कमल झा या , विअक्स स्वरुप या , अनीता देसी , या किरण देसी , या दिनकर जी, गुप्त जी, हरिवंश जी , या धर्मवीर जी हो , या निराला जी, हो या प्रसाद जी ,हो या पन्त जी, हो या दीपक चोपडा जी हो...हम इन सभी को पढ़ते हैं | और अगर आप अंग्रेज़ी की बात करे तो "जॉन ग्रशिम, रोबिन शर्मा, जेफ्री अर्चेर , मून, शेकिल, आदि को हम पढ़ते हैं | हमें तो कभी ऊब नही हुई | हाँ एकरसता के शिकार जरुर हुए और हम उसे भिन्न भिन्न प्रकार के साहित्य पढ़ कर दूर करते रहे |

उतेज़ना कौन नही चाहता है? हां हमारी जेनरेशन घिसी पिटी लीक पर चलना नही चाहती है | हम अपना वजूद ख़ुद बनाना चाहते हैं | हम अपना मार्ग,अपना धेय्य ख़ुद चुनना चाहते हैं | हम किसी का अनुशरण नही करना चाहते | और अगर हम ऐसा करते तो आज हम वही होते जहाँ आज से १०० साल पहले थे | हम किसी चीज़ का अनुशंधान नही करते | किसी चीज़ का आविष्कार नही होता | हम आज भी उसी लालटेन युग में जी रहे होते |

आदमी किसी काम से तभी ऊबता है जब उसके जीवन में एकरसता आ जाती है | उसका काम करने में मन नही लगता है | किसी काम से ऊबने के बाद आप उस काम को कभी अच्छे ढंग से नही कर सकते हैं | एकरसता का शिकार होकर आदमी नीरस हो जाता है | और उस नीरसता के साथ सृजन कभी नही हो सकता है | एकरसता का शिकार तो हम भी कई बार हुए हैं | और जहाँ तक मेरी समझ है इस चीज़ से कोई अछुता नही रह सकता है | हाँ गौर करने वाली बात ये है की हम कैसे इस पर अपना आधिपत्य कायम रखते हैं | कैसे इसे हम अपने आपको नीरस बनाने से रोकते हैं | और कैसे इस एकरसता का रसिक की तरह आनंद उठाते हुए सृजनात्मक कार्यो में दिलचस्पी लेते हैं |

जब हम अपनी पीढी की बात करते हैं तो हम वही है जो दिन के १८ - १८ घंटे काम करते हैं उसके बाद भी तरोताजा रहते हैं | उसके बाद भी हम में इतनी उर्जा रहती है की हम अपने कुछ शौको को अमलीजामा पहना सके | ये शौक कुछ भी हो सकते हैं ... ब्लॉग लिखना, अच्छी अच्छी मूवीज देखना , टीवी देखना , साहित्य पढ़ना , लिखना,...आदि आदि..

हम इस दुनिया में सिर्फ़ रहना नही चाहते हैं, जीना चाहते हैं,...हम जान चुके हैं की हमारी जिंदगी बहुत छोटी है और इसी छोटी सी जिंदगी में ही हमें अपने हर अभिलाषा , हर मनोकामना , हर इच्छा को पूरा करना है , हमें कुछ बनना है ...कुछ कर के दिखाना है | और इसके लिए हम समय के मोहताज़ नही होना चाहते है | इस दुनिया में दो ही तरह के लोग होते हैं....
पहला .. जीवन जैसी चल रही है चलने देते हैं , कोई गिला कोई शिकवा नही ...
दूसरा.. जीवन को अपने हाथो में लेते हैं और इसे अपने अनुसार चलाते हैं ..लड़ते हैं ,गिरते हैं लकिन फिर उठ खड़े होते हैं लकिन हार नही मानते ....और मेरा अपना मानना है की नए जेनरेशन के जयादा तर लोग दूसरी जीवन शैली को अपनाते हैं...

मैंने कुश जी और विवेक जी का भी चिटठा पढ़ा...कुश जी के सुझाव गौर करने लायक हैं...और विवेक जी की कविता काफ़ी मस्त हैं...
तो ये थी हमारी यंग जेनरेशन की सोच...जरुर बताएं हमारी सोच कितनी हद्द तक दुरुस्त है...

चलिए आज ऑफिस में जयादा कुछ काम नही था इसलिए ये पोस्ट लिख सका.. २५ से से छुट्टी है और मैं भी चला लम्बी छुट्टी पर...इस लम्बी साप्ताहांत को मैं बंगलोर में मनाऊंगा...
आप सभी को क्रिसमस की हार्धिक शुभकामनाये ....

Thursday, December 18, 2008

पासवर्ड चोरी हो सकता है

अगर आप इन्टरनेट एक्स्प्लोरर इस्तेमाल कर रहे हैं तो कोई भी आपका पासवर्ड हैक मतलब की चोरी कर सकता है....इन्टरनेट एक्स्प्लोरर जिसकी निर्माता माइक्रोसॉफ्ट है उसने ख़ुद ये बात स्वीकार की है और अपील की है कि लोग तब तक इस ब्राउजर का उपयोग ना करें जब तक वो कोई समाधान ढूँढ नही लेती ....

अभी तक दस हज़ार वेबसाइट इससे संक्रमित हो चुके है...माइक्रोसॉफ्ट के लोग एक पैच बनाने में जुटे हुए हैं जिसे हमें अपने सिस्टम में चलाना पड़ेगा ....उसके बाद ही हमारा आई डी और पासवर्ड सुरक्षित हो सकेगा ...अभी तक जो भी केस सामने आया है वो जयादा तर उसमे जयादा यूजर IE7 इसतेमाल कर ते थे ..ऐसा क्यूँ होता है इसके बहुत सारे कारण है.. वो कभी मैं आराम से लिखूंगा ...

अभी तो बस आपलोगों से निवेदन है कि आपलोग इन्टरनेट एक्स्प्लोरर ना इस्तेमाल करे ...आपके पास दूसरे विकल्प भी हैं ..जैसे....

Google Chrome(recommended)
Mozilla Firefox,
Opera....