Friday, January 9, 2009

तस्वीरें जो बोलती हैं .....

आप ख़ुद निश्चय करें की इन तस्वीरों से आप क्या समझना चाहते हैं ? हम आज कहाँ से कहाँ पहुंच गए पर अभी भी भारत की एक चौथाई जनता को दो टाइम का खाना नही मिल पाता है , जीवन जीने की जो मूलभूत आवश्यकता है वो पुरी नही हो पाती है | मन व्यथित होता है यह सब देख कर | क्या आपका होता है ? हम में से लगभग हर आदमी का कभी न कभी कहीं न कहीं भिखारियों से पाला पड़ता होगा | आपको दया भी आती होगी , कुछ लोग उसे हिकारत भरी नज़रों से भी देखते होंगे | और कुछ लोग उसे सहीं में कुछ देते भी होंगे | पर हमारे दिमाग में ये हमेशा रहता है की , ये तो इनका रोज़ का काम है , ये तो धंधा है इनका | हम इन्हें कुछ दे या ना दे , और ऐसा सोचना सही भी है ......


कुछ दिन पहले हमारे एक मित्र एक ऐसी ही दुविधा में फँस गए थे | सुबह सुबह जब वो घर से निकले ऑफिस जाने के लिए तो रास्ते में एक अधेड़ उम्र के वयक्ति ने उन्हें रोक लिए और उनसे कुछ पैसे की मांग करने लगा | उसने जो बताया उसके अनुसार वो इस जगह पर नया है | यहाँ वो किसी से मिलने आया है , और यहाँ आते ही उसका सारा सामान चोरी हो गया | साथ में उसके पास जो पैसे थे वो भी चले गए | जिससे मिलने आया है , उसका पता और फ़ोन नम्बर भी चला गया | मेरे मित्र असमंजस में पड़ गए | और आख़िर काफ़ी चिंतन के बाद उन्होंने उसे २०० रुपये दे दिए ताकि वो वापस अपने घर को जा सके | बाद में मेरे मित्र ने हम सब अपनी अपनी राय मांगी की उन्होंने ठीक किया या ग़लत |


हो सकता है वो आदमी उनसे झूठ बोल रहा हो , लेकिन अगर वो सच बोल रहा होगा तब क्या ? हम इस चक्कर में क्यूँ पड़ते हैं की वो झूठ बोल रहा है या सही, हमें बस ये देखना चाहिए की हम उसकी मदद कर सकते हैं की नही | अगर हम इस काबिल हैं की हम उसे कुछ पैसे दे सके और इससे हम पर कोई असर ना पड़े , तो हमें बेझिझक उनकी मदद करनी चाहिए |
इन सब स्थिति में मुझे बस रहीम के दोहे याद आ जाते हैं...

"रहीम वे नर मर चुके, जे कहू मंगन ची
उन्ते पहेल वे मुई, जिन मुख निकसत नही "




बहुत सीधी और सरल से बात है अगर आप दिन में ५ लोगो की ही मदद करते हैं और उनमे से अगर १ ही को उस पैसे की जरुरत होती है , तब भी आपकी मदद व्यर्थ नहीं जाती हैं | कम से कम उस १ आदमी को कुछ लाभ तो होगा और अगर आप किसी को नहीं देते तो वो एक आदमी भी उस लाभ से वंचित रह जायेगा | और यहाँ सोचने वाली बात यह है की आदमी तब ही मांगता है जब उसे जरुरत होती है | वैसे मैं अपने इस वाक्य से पुरी तरह सहमत नहीं हूँ | कुछ दिन पहले ही मुझे एक ऐसा मेल मिला था जिसमे जिक्र किया गया था की कैसे कुछ भिखारी भीख मांग कर के ही लखपति बन चुके हैं और अभी भी भीख मांग रहे हैं | पर यकीन मानिए इनकी संख्या गिनती मैं होगी | शास्त्रों में भी कहा गया ही की हमें कुछ न कुछ दान करना चाहिए | बस अपनी हैसियत के अनुसार शुरु हो जाइए |






All Photos:Courtesy-Google

28 comments:

आशुतोष दुबे "सादिक" said...

aap bahut accha lekhe hai,samvedna dil ko chooh gayi hai.aap kabhi mere blog par aa kar follower baniye,aap ki kripa hogi.

आशुतोष दुबे "सादिक" said...

hindustan ka dard aapne bayan kiya hai.

श्रुति अग्रवाल said...

सच है हम अभी भी विकासशील हैं और जब तक हम अमीर और गरीब के बीच बढ़ रही खाई को नहीं पाट लेते तब तक यह सिलसिला चलता रहेगा। आपकी कई फोटो द्रवित करती हैं।

विवेक सिंह said...

ठीक कहा अमित ! हमें गरीबों की मदद करनी ही चाहिए .

PD said...

nahi bhai.. I'm not agree with you..
कभी पौंडीबाजार में दिन भर घूम कर देखो, फिर पता चकेगा कि दिनभर में कम से कम दस लोग ऐसे मिलेंगे जो खुद को महाराष्ट्र या फिर गुजरात का बतायेंगे, और उनके साथ उनका बच्चा और बीबी भी होगी.. सब यही कहानी सुनायेंगे.. चेन्नई में भीख मांगने का यह भी एक धंधा है.. वैसे तेरे उस दोस्त का नाम क्या है?

शाश्‍वत शेखर said...

ये तस्वीरें बोल नही चीख रहीं हैं, ज़रा आंखों में देखिये|

विनय said...

हम मदद करें जिसके परिवार की मासिक औसत आय 25000 से ज़्यादा नहीं होगी और वह क्या करेंगे जिन्हें लाखों रुपये महीने के विकास लिए मिलते हैं। हम लिखते हैं चाहे किताबों में या इन ब्लागों पर, उन भ्रष्टाचारियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता!

---मेरा पृष्ठ
चाँद, बादल और शाम

सुशील कुमार छौक्कर said...

दोस्त दो हिंदुस्तान हैं एक इंडिया में बसता है और एक भारत में बसता हैं।
ये तस्वीरें बोलती है
हमारी तरक्की की पोल खोलती है।
साथ ही एक घटना जिक्र करना चाहूँगा। वैसे उसका जिक्र अपने ब्लोग पर कर चुका हूँ। पर आपके लिए।
काफी साल हो गए इस बात को। एक बार एक लड़का मेरे पास आया और बोला कि एक रुपया दे दो भुख लगी हैं। एक बार मेरा मन भी किया कि नही दूँ और दोस्त ने भी कहा इनका रोज का धंधा है पर दिल नही माना और जेब हाथ डाला तो दो का सिक्का निकला और वो उसे दे दिया। कुछ देर वही लड़का वापिस आया हाथ में ब्रेड थी। पास आकर एक रुपया लौटाकर चला गया। और मैं उसको देखता रहा।

रंजना [रंजू भाटिया] said...

तस्वीरे सच बोल रही है ..बहुत अधिक दिल को छू लेने वाला लिखा है आपने

विष्णु बैरागी said...

सब जगह, सब तरह के लोग होते हैं। इसलिए, यदि दान देने की भावना है तो याचक की 'जेन्‍यूइनिटी' की जांच करना ईश्‍वर के प्रति अपराध है।
धोखा देना अपराध है, धोखा खाना नहीं।

COMMON MAN said...

भारतीय समाज कितना संवेदनहीन है, यह दिखा रही हैं तस्वीरें, हमारे मुंह पर जूता हैं यह.

COMMON MAN said...

जब भी नयी पोस्ट लिखें मेरे ब्लाग पर लिन्क देने की कॄपा करें.

mehek said...

aaj ke bharat ki ek sachhi tasveer ye bhi hai,sahi bayan kiya hai aapne,kisi ek ki maddat bhi ho gayi din safal hua,magar kuch logo ko khana ,kapada tak dhubhar hai,is samasya ka haal kya hai?

Udan Tashtari said...

कुछ कहने को नहीं.

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

निर्धन और गरीब लाचार के दिन सुधरेँ यही कमना है

Harkirat Haqeer said...

sacchai byan karti tasviren .... ek Bharat sadkon ,galion ,kuchon ,jhopdon me gandi k bich bhi basta hai yahi sach hai... aap apni ye tasviren "hind yugm" ko kyo nahi bhejte"kavya pallav"pratiyogita k liye....

chopal said...

आपके दोस्त की दुविधा से बाबा भारती और उनके घोड़े वाली कहानी याद आ गई शायद आपने कहीं पढ़ी हो। संक्षेप में कथा इसप्रकार की है कि बाबा भारती के पास के बेशकीमती घोड़ा था जिसे एक डाकू लेना चाहता था। एक दिन वह डाकू एक गरीब निसहाय व्यक्ति का वेश बनाकर बाबा भारती से वो घोड़ा छीन लेता है। तब बाबा भारती उस डाकू से कहते हैं कि तुम यह बात किसी से मत बताना कि तुमने यह घोड़ा किस प्रकार छीना है। यदि तुम बता दोगे तो लोग गरीबों-असहाय लोगों की सहायता करना बंद कर देंगे। यही कह सकता सभी को जरूरतमंद लोगों की मदद यथासंभव करनी चाहिए।

merichopal.blogspot.com

Dev said...

अमित जी गरीबी सबसे बड़ा अभिशाप है , और आपका यह प्रयाश और सोच बहुत अच्छी बात है .
बहुत से लोग गरीबी में मर जाते है ,बहुत सी योग्य लड़कियों की शादी सही परिवार में नही हो पाती .
बहुत सुंदर सोच .....

विनीता यशस्वी said...

Hindustaan ka ek asli chehra apne saamne laya hai....

Bahadur Patel said...

bahut achchha sanyojan hai. badhai.

shyam kori 'uday' said...

... बहुत ही सुन्दर तस्वीरें हैं, अभिव्यक्ति प्रसंशनीय है।

Amit said...

bhaut bahut aabhaar aaplogo ka jo aap logo ne apne vichaar yahan waykt kiye...

is weekend main bangalore main tha isley blog ki duniya se dur raha...

jaldi hi apne next post ke saath haazir hounga..

RAJIV MAHESHWARI said...

गरीबी सबसे बड़ा अभिशाप है.... कुछ सर्दी से मर जाते है जो कुछ बच जाते है वो गर्मी में लू से .......... जाते है.
हाय ! यही गरीब की जिन्दगी है

htt://paharibaba.blogspot.com

shama said...

Mai nishabd reh gayee hun...tasveeren itnaa boltee hain...
Haan, dekha hai in sabheeko kaheen na kaheen...par apneaapko hatbal nahee mehsoos karti....mujhse jab jo ban pada kar diya...wo bohothi kam tha, ye baat alag, lekin paneeki boond boond se talab banta hai, bas itnaahee sochaa..."karmnyevadhikarste maa phaleshu kadachan.."!Aur kya kahun ?

Anonymous said...

श्याम कोरी साहब क्या कहा आपने ... "बहुत ही सुन्दर तस्वीरें हैं," ये किसी हिरोइन की तस्वीरें है क्या?????
ये तो हमारे मुह पर तमाचा है जनाब.

makrand said...

bahut vicharniye lekh

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

अब तक की सबसे अच्छी ब्लॉग-पोस्ट्स में से एक. मैं तुम्हारी कही अधिकाँश बातों से सहमत हूँ. लेकिन अगर दिल से अच्छे लोग मिलकर जनोत्थान के लिए उचित कदम उठाते हैं तो उसका असर अकेले-दुकेले किए गए छिटपुट कामों से कई गुना होता है. हमारा काम छोटा सा हो सकता है, यथा किसी एक चौराहे के भिखारियों को रोजाना एक निश्चित समय पर नियमित रूप से पौष्टिक भोजन या फलाहार आदि का प्रबंध.

vandana said...

amit aapne prashna achcha uthaya hai .vicharniya hai magar sachchayi dono hi hain.ab ye hum par depend karta hai ki hum kaise sochte hain.bahut tarike hain garib ki madad ke jaruri nhi ki use 1 rupee coin hi diya jaye balki uske liye hum khane ka prabandh ya jarurat ka samn agar de sakte hain to jarur dein uske kisi bachche ke school ki fees ya bimar bachche ki dawayi ka prabandh agar hum kar sakein tab hai asli sahayta.chaurahe par to roj na jane kitne milenge magar agar hum unmein se kisi ek ki bhi jarurat kuch had kar puri kar sakein to apne ko dhanye samjhenge ki ishwar ne hamein ye mauka diya.