Saturday, December 20, 2008

मर कर भी जिन्दा रहता है

कहते हैं प्यार कभी नही मरता है
मर कर भी जिन्दा रहता है
शायद सही ही कहते है
इसलिए ये एहसास आज भी होता है


कमबख्त क्यूँ जिन्दा है ये
मैंने तो कभी नही चाहा
क्यूँ मरता नही ये एहसास
दूर जाके फिर क्यूँ आता है ये पास


हसरते अधूरी रह गयी
अरमानों की बलि चढ़ गई
जाते हुए उन्हें बस देखते रहे
हाथ तो बढाया पर रोक न सके


कहती थी खुदा की यही मर्ज़ी है
खुदा ने भी दगा किया मेरे साथ
अपनी मर्ज़ी उन्हें बता दी और
मेरी मर्ज़ी कही दफना दी


तड़पने का अंदाज़ भी अब बदल रहा है
चेहरे पर हसीं पर दिल जल रहा है
वो लम्हे भुलाए न भूलती है
आगे निकल गए हैं हम ,
पर वो यादें पीछा नही छोड़ती है

9 comments:

avinaash said...

bahut he accha likha hai aapne....dil ke bhaavnaaoo ko darshaati hui ek sundar kavita hai..

kanaFussi said...
This comment has been removed by the author.
sonu said...

mast likhne lage ho bhai.sahi hai...

विनय said...

ख़ूबसूरत अभिव्यक्ति

दिगम्बर नासवा said...

कहती थी खुदा की यही मर्ज़ी है
खुदा ने भी दगा किया मेरे साथ
अपनी मर्ज़ी उन्हें बता दी और
मेरी मर्ज़ी कही दफना दी

लाजवाब लिखा है, अच्छा विचारते हैं आप

PD said...

badhiya likhe ho bhai..
sangat ka asar ho raha hai.. :P
(just kidding.. mujhe ab bhi yaad hai ki hostel me tum sunaya karte the apni najm.. achchha hai.. likhte raho.. :))

शोभा said...

बहुत भावभरी अभिव्यक्ति।

डॉ .अनुराग said...

जमे रहो.......यही दुनिया का नारा है

Prem Tripathi said...

Kya Pyaar Karna Sahi Hai