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Saturday, December 20, 2008

मर कर भी जिन्दा रहता है

कहते हैं प्यार कभी नही मरता है
मर कर भी जिन्दा रहता है
शायद सही ही कहते है
इसलिए ये एहसास आज भी होता है


कमबख्त क्यूँ जिन्दा है ये
मैंने तो कभी नही चाहा
क्यूँ मरता नही ये एहसास
दूर जाके फिर क्यूँ आता है ये पास


हसरते अधूरी रह गयी
अरमानों की बलि चढ़ गई
जाते हुए उन्हें बस देखते रहे
हाथ तो बढाया पर रोक न सके


कहती थी खुदा की यही मर्ज़ी है
खुदा ने भी दगा किया मेरे साथ
अपनी मर्ज़ी उन्हें बता दी और
मेरी मर्ज़ी कही दफना दी


तड़पने का अंदाज़ भी अब बदल रहा है
चेहरे पर हसीं पर दिल जल रहा है
वो लम्हे भुलाए न भूलती है
आगे निकल गए हैं हम ,
पर वो यादें पीछा नही छोड़ती है