Tuesday, December 30, 2008

आतंक , मंदी, उम्मीद तथा सपने

चलिए वक्त आ गया है की हम पुराने साल को अलविदा कहे और नए साल का गरमजोशी के साथ स्वागत करे |काफ़ी कुछ अच्छा नही रहा इस बीतते हुए साल में | अगर संझेप में बात करे तो आतंकवाद से लेकर मंदी की मार ने देश की जनता का काफ़ी दोहन किया | लेकिन वक्त किसी के लिए रुकता नही है , बस चलते जाता है और चलने का नाम ही जिंदगी है | ऐसा नही है की इस बीते साल में हमारी कुछ उपलब्धियां नही रही | अगर गिनाया जाए तो बहुत है , जिसमे मुख्यत: चंद्रायण का सफल मिशन भी शामिल है |

अगला साल कैसा होगा ये कहना तो बहुत मुश्किल है पर हाँ कुछ ऐसे बातें जरुर है जो हमारे चेहरे पर मुस्कान बिखेर सकती है |
१) महंगाई दर में और गिरावट देखने को मिल सकती है |
२) पेट्रोल और डीजल के दाम और गिर सकते है |
३) होम लोन और सस्ता होने जा रहा है | कुछ बैंको ने तो ०.७५% तक ब्याज दर घटा दी है |
४) हवाई किराया सस्ता होने जा रहा है | जेट ने अपने किराए में घटोतरी कर दी है , अब किंग फिशर करने जा रहा है |
५) शेयर बाज़ार में उछाल देखने को मिल सकती है |
६) दूसरे आर्थिक पैकेज जल्द आने की संभावना है |
७) अगले साल चुनाव है इसलिए हम सरकार से लोक-लुभावने बजट की उम्मीद कर सकते है |
८) सरकारी छेत्रो में और नौकरियों का इजाफा हो सकता है | कुछ बैंको ने पहले ही रिक्त सथानो की पूर्ति के लिए चयन परीक्षा की घोषणा कर दी है |

सपने देखने में कोई बुराई नही है | उम्मीद पर ही दुनिया कायम है, और हम तो भाई हमेशा सकारात्मक सोच रखते है | हाँ अब भी कुछ चीजें है जो अगले साल भी ना बदले | उनमे सबसे प्रमुख है ये मंदी का महादानव और इससे प्रभावित ये प्राइवेट सेक्टर | हमारी सरकार कितनी भी कोशिश कर ले लेकिन इस मामले में हम अमेरिका पर बुरी तरह निर्भर है | इस साल अब तक बहुत से लोगो की नौकरियां जा चुकी है या यूँ कहे की इस मंदी का महादानव ने निगल लिया है और ये शायद अगले साल भी जारी रहे | दूसरे सेक्टर की मैं बात नही करूँगा , चुकी मैं आईटी सेक्टर में हूँ इसलिए मैं इसके बारे में कह सकता हूँ की अगले साल भी इसमे हमें मंदी देखने को ही मिलेगी | इसका सबसे प्रमुख कारण है की अभी भी हमारे देश से आईटी सेक्टर को काफ़ी कम या यूँ कहे ना के बराबर प्रोजेक्ट मिलता है | और हम प्रोजेक्ट के लिए पश्चिमी देशो पर निर्भर रहते हैं , और जब तक उनकी हालत नही सुधरेगी तब तक हमारी देश की कंपनियों का भी यही हाल रहने वाला है |

चलिए अब वक्त आ गया है की हम पुरानी बातें भूल कर नए साल का खुले ह्रदय से स्वागत करे | नए साल में ज्यादा कुछ नही , हम तो बस इतना चाहते हैं की हमें खुश रहने के लिए वजहें ना ढूँढनी पड़े |

13 comments:

Abhinav said...

haan yaar umeed par he duniya kaayam hai..dekho kya hota hai naye saal me..

seema gupta said...

लेकिन वक्त किसी के लिए रुकता नही है , बस चलते जाता है और चलने का नाम ही जिंदगी है
सुंदर भाव प्रकट किए हैं आपने, उम्मीद और आशा से भरे, जीने के बहाने लाखों है अगर खुशी से जीना हो तो ... नये साल की शुभकामनाओ के साथ.."

regards

makrand said...

bahut khub

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सुन्दर और बेहतर लिखा आपने ! उम्मीद पर ही सब जिन्दा है और सब कुछ नये साल मे सुखद हो यही शुभकामनाएं हैं !

नय्र साल की रामराम !

सुशील कुमार छौक्कर said...

चलने का नाम ही जिंदगी है। उम्मीद पर दुनिया कायम हैं।
सोलह आने सच है जी।
नववर्ष की आपको ढेरों शुभकामनाएं।

MANVINDER BHIMBER said...

नय्र साल की शुभकामनाएं
सुंदर भाव प्रकट किए हैं आपने.....

Amit said...

आप सभी लोगो को भी नव वर्ष की शुभकामनाये

Anonymous said...

kuch naya likho yaar...

Amit said...

अनाम जी कोशिश जारी है..देखते हैं आपकी उमीदो पर कब खरे उतरते हैं

Pankaj said...

Hi Amit,
Wish you A very happy New Year 2009
Bye

PN Subramanian said...

खुश रहने के लिए वजह की ज़रूरत नहीं होती. यह एक स्वनिर्णय होता है - खुश रहना है भले लोग कितना भी हमें दुखी करने की कोशिश करें. आप के लिए नव वर्ष मंगलमय हो.

ARVI'nd said...

happy new year amit....apni soch par kabu rakhkar jo positive sochta hai wahi khush rah sakta hai....achhi koshish hai aapki.nayaa saal mubaarak ho dost nay saal aapke,aapko chahne waalo ke liye aur aapke apno ke liye dher saari khushiya lekar aaye.aap positive thinking waale lagte hai...apne soch ko yun hi bulandiyo tak le jaaye yahi dua hai ek dost ki.

नीरज गोस्वामी said...

नव वर्ष की आप और आपके समस्त परिवार को शुभकामनाएं....
नीरज