हमारी एक मित्र है , और वो बहुत अच्छा लिखती हैं ! आज ऐसे ही बात बात मैं पता चला की उन्होंने अपना ब्लॉग भी शुरू किया था पर लिखना छोड़ दिया और काफ़ी महीने से उन्होंने उस पर कुछ नही लिखा है | उनकी रचना इतनी सुंदर, इतनी भावुक होती हैं की मत पूछिए | मैंने जितनी भी उनकी रचना पढ़ी है सब जीवन की यतार्थ को दर्शाती हैं | उनकी ही एक रचना मैं यहाँ आप सब के सामने पोस्ट कर रहा हूँ....
आज फ़िर मैंने खुली आँख से सपना देखा
दिल ने फ़िर दूर कहीं आज वो अपना देखा
धुंधला था सब कुछ पराया था जहाँ
मेरा कुछ भी नही कुछ और ही पाया था वहाँ
अकेले रास्ते गलियाँ गुम से गुमसुम मुकाम
कोहरे की बाहों मे लिपटे हुए किस्से तमाम
अँधेरी स्याह थी दुनिया -- खामोशी बसी थी
क्यों ऐसे मोड़ पर सपनो की दुनिया आ रुकी थी?
मुड़ के देखा-- मुझे यादें मिली कुछ-- भूल से
पुरानी जर्जराती और सनी सी धूल से
कई सपने मिले जो हर तरह गुमनाम थे
बड़े छोटे अधूरे से कुछ ख़ास और आम से
चाँदनी भी अलग थी हर तरफ़ छनती रही
कहीं मकडी के जालों मे फंसी कसती रही
दिल मे थी एक खुशी कुछ भूला सा मिल जाने की
और थी एक चुभन जो सब खोया -- याद आने की
दिल था बोझिल -- अचानक राह आगे खुल गयी
सपनो की दुनिया मे मंजिल नयी फ़िर मिल गयी
इन्ही यादों से मै- मै हूँ नही कोई और है
उड़ान बाकी है मेरी -- अभी आसमा कई और हैं
ख्वाब के रास्ते मैंने रुक के ख़ुद को फ़िर देखा
अपनी आंखों से अपनी रूह का आईना देखा
आज फ़िर मैंने खुली आँख से सपना देखा
दिल ने फ़िर दूर कहीं आज वो अपना देखा
हिमालय की कुछ और छवियां
2 hours ago



28 comments:
लिखने वाले का कुछ नाम, ब्लॉग एड्रेस वगैरह भी दें तो बेहतर. अच्छा लिखा है.
Achhi kavita lagayi hai...
इन्ही यादों से मै- मै हूँ नही कोई और है
उड़ान बाकी है मेरी -- अभी आसमा कई और हैं
ख्वाब के रास्ते मैंने रुक के ख़ुद को फ़िर देखा
अपनी आंखों से अपनी रूह का आईना देखा
आज फ़िर मैंने खुली आँख से सपना देखा
दिल ने फ़िर दूर कहीं आज वो अपना देखा
आपकी मित्र ने अच्छा लिखा है लेकिन अगर आप उनका लिंक या ब्लॉग का पता देते तो और भी अच्छा होता ....
waah sundar
दिल को छू गई ये रचना।
फ़ालो करें और नयी सरकारी नौकरियों की जानकारी प्राप्त करें:
सरकारी नौकरियाँ
वाकई बहुत अच्छा लिखा है.. गुज़ारिश करिए.. निरंतर लिखा करे..
सुंदर अति सुंदर, आपकी मित्र को बहुत बधाई.
रामराम.
बहुत अच्छा लिखा है, नहीं लिखी है. आभार.
बेहद खूबसूरत कविता. एक सुंदर और सफल प्रयास.
धन्यवाद
फॉलो करें और जाने की कैसे लीका को शहर की हवा लगती है..
लईका के शहर के लागल बा हवा ;)
अरे भाई, उसका ब्लौग पता मुझे मेल करना..
ati sundar.
समयचक्र: चिठ्ठी चर्चा : चिठ्ठी लेकर आया हूँ कोई देख तो नही रहा हैबहुत अच्छा जी
आपके चिठ्ठे की चर्चा चिठ्ठीचर्चा "समयचक्र" में
महेन्द्र मिश्र
Achchi rachna hai.
आपकी मित्र को लिखना जारी रखना चाहिए .
'और थी एक चुभन जो सब खोया -
- याद आने की
दिल था बोझिल -
- अचानक राह आगे खुल गयी
-'अच्छी लगी कविता '.
बहुत खूब। आपको साधुवाद।
आपके पसंद भी लाजवाब है
आपको होली पर्व की हार्दिक बधाई एवम घणी रामराम.
Achhi rachna se vakif karaya aapne.
Amitji,
Kya gazab likhte hain...aur despite being an engineer...am too an libran...do visit my blogs...wld b a pleasre..
app kaa bahat achha soch he.Aur,kabita ki bhasa ki saili bahat unda he ...
रचना अच्छी लगी....बहुत बहुत बधाई।लिखने वाले का नाम भी दें....
bahut sundar rachnaa hai aapke dost ko likhne ke liye uksaaiye!!
एक शानदार खबर आप लोगो के लिए पुरानी है पर आप लोगो ने सुनी नही होगी आप सभी महनुभाओ के विचार आमंत्रित है
यू-ट्यूब की यह लिंक देखें और अपना कीमती (और असली) खून जलायें… सेकुलर UPA sarkar के सौजन्य से… :)
http://www.youtube.com/watch?v=NK6xwFRQ7BQ
इतनी अच्छी लगी आपकी दोस्त की कविता....कि हम भी रह नहीं पाए....और हमसे भी निकल पडा....!!
रोज आँखे हुई मेरी नम
रोज इक हादसा देखा....!!
मुझसे रहा नहीं गया तब
जब किसी को बेवफा देखा !!
मैं खुद के साथ जा बैठा
जब खुद को तनहा देखा !!
रूठ जाना मुमकिन नहीं
बेशक उसे रूठा हुआ देखा !!
गलियां सुनसान क्यूँ हैं भाई
क्या तुमने कुछ हुआ देखा !!
मैं उसे तन्हा समझता रहा
पर इतना बड़ा कुनबा देखा !!
आज तुझे बताऊँ "गाफिल"
धरती पर क्या-क्या देखा !!
इष्ट मित्रों एवम कुटुंब जनों सहित आपको दशहरे की घणी रामराम.
भाई आपके दोस्त का जवाब नही..पर ये आपने अच्छा नही किया(unke blaag ka adress naa bata ker)ऒर आपको क्या कहे आप तो लाजवाब हॆ आभार
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