Monday, February 16, 2009

दर्द भी बढ़ता है सुनाने से ...


पूछ लो तुम भी इस ज़माने से ,
प्यार छुपता नहीं छुपाने से

प्यार दिल में है तो लाओ ज़बान पे ,
आग बढती है ये बुझाने से .

तुम्हें न पाना शायद बेहतर है ,
पा के फिर से तुम्हें गंवाने से .

चलो एक दुआ तो अपनी पूरी हुए ,
मिल लिए अपने एक दीवाने से .

रोये जाते हो , बस रोये जाते हो ,
क्या होगा ये धन लुटाने से .

करो कोशिश की कुर्बतें ही रहे ,
दूरियां बढ़ जाती हैं बढ़ने से .

क्या सुनाएं किसी को राज़ -ऐ -दिल ,
दर्द भी बढ़ता है सुनाने से .



आज हमारे एक मित्र अफरोज (भाई जान ) ने बहुत ही सुंदर सी नज्म हमें भेजा | और हमने इसे यहाँ आप सभी के पढने के लिए पोस्ट कर दिया |

16 comments:

seema gupta said...

तुम्हें न पाना शायद बेहतर है ,
पा के फिर से तुम्हें गंवाने से .
" दिल खुश हो गया इतनी सुंदर नज़्म से......ये पंक्ति कुछ खास है क्यूंकि इसमे डर और दर्द दोनों ही का संगम है ...अफरोज जी और आप का शुक्रिया "
Regards

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत लाजवाब रचना. अफ़रोज जी और आपको धन्यवाद.

रामराम.

vandana said...

bahut badhiya rachna.

mamta said...

आपका और आपके मित्र का शुक्रिया करना चाहिए जो इतनी सुंदर नज्म पढने को मिली ।

mehek said...

sach behtarin har sher lajawaab,bahut badhai afroz ji ko aur aapka shukran itani khubsurat nazm padhwane vaste.

PN Subramanian said...

दर्द भी बढ़ता है सुनाने से - बहुत सुंदर. हमें पता नहीं था कि ऐसा भी होता है. आभार.

सुशील कुमार छौक्कर said...

क्या सुनाएं किसी को राज़ -ऐ -दिल ,
दर्द भी बढ़ता है सुनाने से .

आज का सच है। शुक्रिया पढवाने का।

हरि said...

बेहतरीन। भाई अफरोज और आपका शुक्रिया।

विनीता यशस्वी said...

Behtreen gazal hai

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर रचना...

राज भाटिय़ा said...

बहुत बहुत धन्यवाद इसे पढवने का, बहुत सुंदर लगा,

RAJIV MAHESHWARI said...

आपका और आपके मित्र का शुक्रिया .....
सुंदर नज्म पढने को मिली, पोस्ट पर जो चित्र लगया है उसने तो इस नज्म में चार चाँद लगा देये है.

pankajrago said...

Very nice poem Amit sahab

प्रीति टेलर said...

क्या सुनाएं किसी को राज़ -ऐ -दिल ,
दर्द भी बढ़ता है सुनाने से .


sahi hai har vakt ek aur baar dastan sunate vakt..par ye jalim jamane ko bhi is ko kuredane me hi maja aata hai

यारों का यार said...

Amit bhai, Can you say who has written this beautiful poem? I want to publish it on my blog too.

Digital Transformation Consulting said...

I certainly agree to some points that you have discussed on this post. I appreciate that you have shared some reliable tips on this review.